Ashok

Ashok

‌‌‌‌‌‌‌अशोक
* बिन्दुसार की मुत्यु के पश्चात उसका सुयोग्य पुत्र अशोक विशाल मौर्य सामाज्य की गद्दी पर बैठा।
* वह विश्व का पहला सम्राट था जिसने साम्राज्यवादी युग में युद्ध नीति का त्याग किया और प्रजा को सतांन समझा।
* अशोक ने कलिगं 261 र्इ.पू. जीता था।
* चार वर्ष के सत्ता सघर्ष के बाद राज्यभिषेक 269 र्इ.पू. मे हुआ।
* अशोक 273 र्इ.पू. मे ही मगध के राजसिहांसन पर बैठा चुका।
* सबसे पहले मास्की अभिलेख में अशोक नाम मिलता है।
* कल्हण की राजतरंगिणी के अनुसार अशोक ने वितस्ता नदी के किनारे श्रीनगर नामक नगर की स्थापना की।
* अभिषेक के आठंवे साल लगभग 261 र्इ.पू. में कलिग पर आक्रमण किया। उस समय कलिग का राजा नदंराज।
* तिब्बती जनश्रुति के आधार पर अशोक ने नेपाल में ललितपुर नामक नगर बसाया।
* अशोक की बेटी चारूमती ने देवपतन नामक नगर बसाया।
* कलिग युद्ध के बाद अशोक ने भेरी घोष को त्याग कर धम्म घोष को अपनाया।
* अशोक आरम्भिक बर्षों मे अपने पूर्वजो की तरह ब्राह्मण धर्म का अनुयायी था।
* महावशं के अनुसार वह प्रतिदिन 60000 ब्राह्मणो को भोजन खिला करता था।
* कल्हण की राजतरगिणी के अनुसार वह शिव का उपासक था।
* निग्रोध के प्रवचन सुनकर अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया।
* उत्तरी भारत की अनुश्रुतियो के अनुसार उपगुप्त नें अशोक को बौद्धधर्म में दीक्षित किया।
* राज्यभिषेक के 10 वे साल में अशोक ने बोधगया की यात्रा की।
* अनुश्रुतियों के अनुसार अशोक ने 84000 स्तूपो का निर्माण भी करवाया।
* अशोक ने बौद्ध की तीसरी बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र में बलायी।
* बाराबर पहाड़ियों मे अशोक ने आजीवकों के रहने हेतु चार गुहाओं का निमार्ण करवाया जिनका नाम कर्ण,चोपार,सुदामा व विश्व झोपड़ी थी।
* अशोक राज्यभिषेक के 20 वे वर्ष लुम्बिनी (कपिलवस्तु) पहुचा यह स्थान बुद्ध का जन्म स्थान है।
* अशोक अन्तिम चरण में कुशीचरण पहॅुचा जहॉ पर को महापरिनिर्वाण प्राप्त हुआ था।
* अशोक ने राज्यभिषेक के 14 वे वर्श बाद कनकमुनि बौद्ध स्तुप की लम्बार्इ दुगुना करवाया।
* अबतक अशोक के करीब 40 अभिलेख प्राप्त हुए है।
* सभी अभिलेखो में लिपियों का प्रयोग किया गया है बाह्मनी खारोष्ठी, ग्रीक एवं आमेइक।
* अशोक ने राष्ट्रीय भाषा एवं लिपि के रूप में पालि भाषा एवं ब्राहृमी लिपि का प्रयोग किया।
* 1837 में जेम्स प्रिसेप ने ब्राहृमी लिपि में लिखा षिलालेख पढ़ा था। अशोक के समय में प्रशासन छोटी इकार्इ गोप ।
* अशोक सिहासन पर बैठने से पहले वह गर्वनर उज्जैन एवं तक्षशिला सवसे छोटा स्तम लेख।
* अशोक के समय में मगध को पॉच भागो मे बटा गया था।
* अशोक के लधु शिलालेख लगभग 15 स्थानो पर प्राप्त हुए है।
* 1750 में टीफेंथैलर ने सर्वप्रथम दिल्ली में अशोक स्तम्भ का पता लगाया।
* अशोक की मॉ का नाम सुभ्रदांगी या धम्मा था जो चम्पा की ब्राह्मण की बेटी थी।
* शिलालेख की सख्या 14 है।
* महाबोधिवश में अशोक की पत्नी का नाम वेदिश महादेवी मिलता है।
* पुराणों में अशोक को अशोक वर्धन कहा गया है।
* दिव्यावदान में अशोक की पत्नी का नाम तिष्यरक्षिता मिलता है।
* अभिलेखों में अशोक को देवानापिय तथा पियदस्सी कहा गया है।
* सिहलीग्रन्थ दीपवंश में अशोक को प्रियदर्शन तथा प्रियदशी कहा गया है। अनेक विद्वानों का मत है कि प्रियदर्शन तथा प्रियदशी अशोक की उपाधियॉ थी।
* अशोक ने साम्राज्य के प्रत्येक जिले तथा नगर में महामात्रो की नियुक्ति की थी।
* लधुशिला में अशोक ने अपने को बुद्ध शाक्य कहा है।
* अशोक ने मज्झान्तिक को कश्मीर एवं गांधार मे बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भेजा था।
* अशोक के अतिंम शिलालेख की खोज बीडन महोदय ने सन् 1915 र्इ. में मास्की मे की थी।
* कन्धार शिलालेख की भाशा यूनानी एवं अश्माइक है।
* टोपरा स्तम्भ लेख हरियाणा के टोपरा नामक गॉव में स्थापित किया गया था कालान्तर में फिरोज तुगलक इसे दिल्ली में ले आया।आज यह फिरोजशाह कोटला में स्थित है।
* रूमिन्देर्इ लधु स्तम्भ लेख नेपाल की तरार्इ से प्राप्त हुआ है।
* अशोक के लगभग सभी अभिलेखो की भाषा प्राकृत है।
* 11 वें शिलालेख में अशोक ने धर्मदान को साधारण दान से अधिक उत्तम बताया है।