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Amritwani
‌‌‌‌‌‌‌‌अमृतवचन

☞ इच्छा की प्यास कभी नहीं बुझती,न पूर्णरूप से सन्तुष्ट होती है-सिसरो ने कहा था।
☞ अनुभूतियों के सरोवर में आत्मविश्वास के कमल खिलते है-अमृतलाल नागर ने कहा था।
☞ जो अधिक धनी है वह अधिक अधीन है- शेखसादी ने कहा था।
☞ दूसरों की न तो आलोचना करो और न उन पर दोषारोपण करो,उनके साथ प्रेम और सहानुभूति का व्यवहार करो-सत्य सार्इ बाबा ने कहा था।
☞ कुरीति के अधीन होना कायरता है,उसका विरोध करना पुरूषार्थ है-महात्मा गांधी जी ने कहा था।
☞ अहंकारी व्यक्ति केवल अपने ही महान् कार्यो का वर्णन करता है और दूसरे के केवल बुरे कर्मो का-स्पिनोजा ने कहा था।
☞ अन्याय का राज्य बालू की भीत है-जय शंकर प्रसाद ने कहा था।
☞ अनियमित गरीबी से अनियमित अमीरी अधिक भयानक है-बीचर ने कहा था।
☞ असन्तुष्ट मनुष्य संसार में अधिक दिनों तक जीवित नही रहते- शेक्सपीयर ने कहा था।
☞ एकता से हमारा अस्तित्व कायम रहता है,विभाजन से हमारा पतन होता है-जॉन डिकिन्सन ने कहा था।
☞ किसी कार्य का प्रारम्भ उनका सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है-प्लेटो ने कहा था।
☞ आलस्य वह राजरोग है जिसका रोगी कभी नहीं सॅभलता-प्रेमचन्द ने कहा था।
☞ आलस्य दरिद्रता की कुजी और सारे अवगुणों की जड़ है-स्परजन ने कहा था।
☞ कभी-कभी मौन रह जाना सबसे तीखी आलोचना होती है-अज्ञात।
☞ नेपोलियन ने कहा था कि आत्माहात्य करना कायरता है।
☞ महात्मा गॉधी ने कहा था कि हम दबाव से अपनुशासन नहीं सीख सकते है।
☞ प्रेमचन्द ने कहा था कि केबल बुद्धि के द्धारा ही मनुष्य का मनुष्यत्व प्रकट होता है।
☞ अज्ञात- आशावादी हर कठिनाई में अवसर देखता है,पर निराशावादी हर अवसर में कठिनार्इ खोजता है।
☞ पाइथागोरस ने कहा था कि क्रोध मूर्खता से प्रारम्भ होता है और पश्चाताप पर समाप्त होता है।
☞ लक्ष्मीनारायण मिश्र ने कहा था कि भाग्य बिगड़ने पर सगे भी पराए हो जाते हैं,अन्धकार में छाया भी साथ छोड़ जाती है।
☞ अज्ञात-कार्यकुषल व्यक्ति के लिए यश और धन की कमी नही।
☞ एक कहावत है कि तलवार का घाव भर जाता है, पर अपमान का नहीं।
☞ नेपोलियन ने कहा था कि किसी कार्य को सूबसूरती से करने के लिए मनुष्य को उसें स्वय करना चाहिए।
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