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Amritwani
‌‌‌‌‌‌‌‌अमृतवचन

☞ प्रेमचन्द ने कहा था कि युवाकाल की आशा पुआल की आग है जिसके जलने और बुझने में देर नहीं लगती।
☞ तिरूवल्लुवर ने कहा है कि किसी निश्चय पर पहुचना ही विचार का उछेश्य है और जब किसी बात का निश्चय हो जाए,तो उस पर अमल करने में देर करना भूल है।
☞ शॉपेन हॉवर ने कहा था कि आवश्यकता उपयोगी कलाओं की जननी है और विलासिता ललित कलाओं की।
☞ वाल्टर स्कॉट ने कहा है कि कायरों और संशयशील व्यक्तियों के लिए प्रत्येक वस्तु असम्भव है क्योकि उन्हें ऐसा ही प्रतीत होता है।
☞ भगवान् कृष्ण ने कहा था कि गुरूजनों का अनादर ही उनका वध कहलाता है।
☞ बेकन ने कहा था कि धूर्त मनुष्य अध्ययन का तिरस्कार करते है,सरल मनुष्य उसकी प्रशांसा करते है और ज्ञानी पुरूष उसका उपयोग करते है।
☞ नीतिसभ्मतं है कि स्वार्थवश ही दुर्जन व्यक्ति को साथ नही लगाना चाहिए-अज्ञात
☞ जिन्हें कहीं से प्रशांसा नहीं मलती वे आत्म-प्रशांसा करते है- अज्ञात
☞ जब क्रोध आए तो उसके परिणाम पर विचार करो-कनफ्यूषियस ने कहा था।
☞ अकृतज्ञता ही मनुष्यत्व का विष है- सर पी. सिडनी ने कहा था।
☞ डॉ. रामकुमार वर्मा ने कहा है कि पवित्र नारी का अपनाम में क्रान्ति का अग्रदूत है।
☞ क्रान्ति का उदय सदा पीड़ितों के हृदय एवं त्रस्त व्यक्तियों के अन्तकरण में हुआ करता है-अज्ञात
☞ सोफोक्लीज ने कहा है कि कोई साक्षी इतना विकट और कोर्इ अभियोक्ता इतना शक्तिशाली नहीं है जितना कि अपना ही अन्त:करण।
☞ सहस्र गुणों का सम्पादन कर लेना सरल है,एक दोष ठीक कर लेना दुष्कर है-ब्रुयर ने कहा था।
☞ अनुशासन किसी के ऊपर थोपा नहीं जाता,अपितु आत्म अनुशासन लाया जाता है-अटल बिहारी बाजपेयी ने कहा है।
☞ क्रोध के सिंहासनासीन होने पर बुद्धि वहॉ से खिसक जाती है-एम.हेनरी ने कहा था।
☞ अनुष्ठान से अनुग्रह प्राप्त होता है-सत्य साई बाबा ने कहा है।
☞ आत्माविश्वास,आत्मज्ञान और आत्मसंयम,केवल यही तीन को परमशक्ति सम्पन्न बना देते है-टेनीसन
☞ वे कभी असफल नहीं होते जिनकी मृत्यु महान् उछेश्य के लिए होती है-बायरन
☞ महर्शि वाल्मीकि ने कहा है कि उत्हास ही बलवान् होता है,उत्साह से बढ़कर दूसरा कोर्इ बल नहीं है,उत्साही पुरूष के लिए संसार में कोर्इ भी वस्तु दुलभ नही है।
☞ यौवन,धन सम्पत्ति,प्रभुता और अविवेक-इनमें से एक-एक भी अनर्थ के लिए पर्याप्त है फिर जहॉ ये चारों मौजूद हों उसके लिए क्या कहना-पंचतंत्र
☞ आत्मसम्मान के लिए मर मिटना ही दिव्य जीवन है-जयशंकर प्रसाद ने कहा है।
☞ धनुष से छुटा हुआ तीर और मुख से निकला हुआ शब्द वापस नहीं लौटता एक बार सहा अपमान भुला नहीं जा सकता है-अज्ञात
☞ अकर्मण्य,बहुत खाने वाले, क्रूर, देशकाल का ज्ञान न रखने वाले और निन्दित वेश धारण करने वाले मनुष्य को कभी अपने घर में न ठहरने दें-महात्मा विदुर ने कहा था।
☞ हजरत मुहम्मद ने कहा है कि अभिवादन से प्रेम और सद्भावना का निर्माण होता है।
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