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Amritwani
‌‌‌‌‌‌‌‌अमृतवचन

☞ कार्य मनोरथ से नहीं उधम से सिद्ध होते है,जैसे सोते हुए सिंह के मुहॅ में मृग अपने आप नहीं चले जाते-पंचतंत्र
☞ अपार धनशाली कुबेर भी यदि आय से अधिक व्यय करे , तो कंगाल हो जाता है-चाणक्य
☞ ईर्ष्यालु मनुष्य स्वंय ही ईर्ष्याग्नि मे जला करता है, उसे और जलाना व्यर्थ है-सादी
☞ एकता से हमारा अस्तित्व कायम रहता है विभाजन से हमारा पतन होता है-जॉन डिकिन्सन
☞ बीस वर्ष की आयु में संकल्प शासन करता है,तीस वर्ष मे बुद्धि,चालीस वर्ष मे विवेक-फ्रेंकलिन
☞ ईर्ष्या अपनी हीनता के बोध में से जन्म लेती है और वह उस हीनता को दूर नही करती सिर्फ दबाती है-जैनेन्द्र
☞ कुशासन के प्रति विद्रोह करना ईश्वर की आज्ञा मानना है-फ्रेंकलिन ने कहा था।
☞ अभिमानी जो अहंकारपूरक प्रात: जलपान करता है उसको सायंकाल का भोजन तिरस्कार से मिलता है-फ्रेंकलिन
☞ ईमानदार व्यक्ति ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति है-पोप
☞ जिस प्रकार भ्रमर फूलो का रक्षा करता हुआ मधु ग्रहण करता है,उसी प्रकार मनुष्य को हिंसा न करते हुए अर्थो को ग्रहण करना चाहिए-महात्मा विदुर
☞ धर्म,कर्म,काम और मोक्ष का उत्तम साधन आरोग्य है-चरक संहिता
☞ अभिलाषा तभी फलोत्पादक होती है जब वह दृढ़ निश्चय मे परिणित कर दी जाती है-स्वेट मार्डेन
☞ आग,आग से नहीं पानी से शांत होती है-प्रेमचन्द
☞ इच्छा की प्यास कभी नहीं बुझती,न पूर्णरूप से सन्तुष्ट होती है-सिसरो
☞ अहंकारी व्यक्ति केवल अपने ही महान् कार्यों का वर्णन करता है और दूसरे के केवल बुरे कर्मो का-स्पिनोजा
☞ महान् व्यक्ति न किसी का अपमान करता है और न उसको सहता है-होम
☞ मनुष्य अनुकरण करने वाले प्राणी है और जो सबसे आगे बढ़ जाता है वही समूह का नेतृत्व करता है- शिलर
☞ आपत्ति मनुष्य बनाती है और सम्पति ‘राक्षस’-विक्टर हृागो
☞ ज्यों-ज्यों अभिमान कम होता है,कीर्ति बढती है-यंग
☞ मनुष्य की प्रतिष्ठा ईमानदारी पर ही निर्भर है-श्रीराम शर्मा आचार्य
☞ अहंकारी व्यक्ति में कृतज्ञता बहुत कम होती है, क्योकि वह यही समझता है कि मैं जितना पाने योग्य हॅू उतना मुझे कभी प्राप्त नहीं होता-एच.डब्ल्यू.बीचर
☞ उदारता उच्च वंश से आती है,दया और कृतज्ञता उसके सहायक है-कारनेल ने कहा था।
☞ किसी के अनुग्रह की याचना करना अपनी आजादी बेचना है-महात्मा गॉधी ने कहा था।
☞ वाणी ही मनुष्य का एक ऐसा आभूषण है,जो अन्य आभूषणों की भॉति कमी नहीं घिसता- भर्तृ र्हरि ने कहा था।
☞ अपकीर्ति अमर है और जब कोई उसे मृतक समझता है तब भी वह जीवित रहती है-प्ल्यूटस ने कहा था।
☞ धनवान और निर्धन का अतंर कितना नगण्य है,एक ही दिन का भूख और एक ही घण्टे की प्यास दोनों का समान बना देती है-खलील जिब्रान ने कहा था।
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