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Harappan Civilization
‌‌‌‌‌हड़प्पा सभ्यता

*सिंधु सभ्यता के सबंध मे प्रथम जानकारी चाल्र्स मेशन ने 1826 में दी थी।
* भारत मे सबसे बड़े हडप्पाई स्थल है-धौलाबीरा,राखीगढ़ी।
* चमकीले मृदभाड संस्कृति का सबंध गुजरात के कच्छ तथा काठियावाड़ प्रदेश से है। बाड़ा सस्कृति का संबंध पंजाब से है।
* गैरिक मृदभांड संस्कृति का संबंध गंगा-युमना दोआब से है।
* मोहनजोदड़ो का अन्नागार गढी के अदर स्थित है।
* हड़प्पा का अन्नागार गढ़ी के बाहर निचले शहर स्थित है।
* चन्हुदड़ो दुर्ग रहित शहर था। लोथल नगर लगभग आयाताकार था तथा चारो ओर ईट का विशाल दीवार से घीरा था। यहॉ से निचले शहर के भी किलेबंदी के साक्ष्य मिले है।
* कालीबंगा से दो फसलों को उगाने का प्रमाण (कम दूरी पर चना और अधिक दूरी पर सरसो) मिला है। पूर्व हड़प्पा काल मे खेत जोते जाते थे।
* रोपड़ से मानव कंकाल के साथ कुत्ते का कंकाल प्राप्त हुआ।
* रंगपुर गुजरात से न तो कोई मुद्रा और न ही कोई मातृदेवी की मूर्ति प्राप्त हुई है।
* कलश शवाधान के साक्ष्य सुरकोतड़ा से मिला है।
* हड़प्पाई नगरो के सामान्यत: निचले शहर किलेबंद नही थे परंतु अपवादस्वरूप लोथल, कालीबंगा तथा सुतकोदड़ा मे निचले शहर भी किलाबंद थे।
* सुरकोतड़ा नगर की रक्षात्मक दीवार पत्थर की बनी थी जबकि अन्य सैधव नगरों की रक्षात्मक दीवार कच्ची मिटटी से बनी थी।
* सैंधव कालीन ईटों की मोटाई चौड़ाई और लंबाई का अनुपात 1:2:4 था।
* पीपल सर्वाधिक पुजनीय था और सर्वाधिक पवित्र पशु एक श्रंगी पशु था।
* कूबड़ वाले बैल को शक्ति के प्रतीक के रूप मे पूजा जाता था।
* हड़प्पावासी सर्प की भी पूजा करते थे।
* हड़प्पा में काले रंग की आकृतियों से चित्रित लाल मृदभाड़ का निर्माण हुआ।
* हड़प्पा में मूर्ति निमार्ण मे स्त्री की प्रतिकृतियॉ पुरूषों की वनिस्पत अधिक थी।
* हड़प्पा से नृत्य मुद्रा मे बनी बिना सिर की मूर्ति मिली है। मार्शल ने इसे नटराज का पूर्व रूप माना है।
* हड़प्पा से मुहरो मे एक श्रृंगी पशु की आकृति सवाधिक थी।
* मोहनजोदड़ो से सबसे अधिक मुहरे प्राप्त हुई है।
* कालीबंगा की मुद्रा पर बाध का चित्र का एकमात्र प्रमाण मिला है।
* हड़प्पा सभ्यता की बस्तियो को अधिकतर गुलाबी रंग के मिट्टी के बत्तनो से पहचाना जाता है।
* पक्की हुई और बिना पक्की ईटों का इस्तेमाल हड़प्पा सभ्यता के निवासी किया करते थे।
* कच्ची ईटों का प्रयोग कालीबंगा मे किया गया।
* भवनो और इमारतों के लिए पक्की ईटो का इस्तेमाल मोहनजोदड़ो मे किया गया।
* विशाल स्नानागार की लबांई. चौड़ाई. 230X781 मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई.।
* हड़प्पा मे मिट्टी के कुछ बर्त्तनो पर मुद्रा के निशान पाये जाने से सकेत मिलता है कि कुछ खास किस्म के बर्त्तनों का व्यापार भी किया जाता था।
* हड़प्पावासियो के मूल औजार ताबे तथा कांसे के थे। इसमे चपटी,कूल्हाड़ी,छैनी चाकू हराबल और बाणाग्र मुख्य रूप से पाये गये है।
* कांसे और ताबे की ढलाई. तकनीक हड़प्पा के लोग जानते थे।
* औजारो का निर्माण बड़े पैमाने पर सिंध मे सुक्कर जैसे उधोग क्षेत्रो मे किया जाता था।
* सेलखड़ी का प्रयोग मनके बनाने के लिए सवसे अधिक किया जाता था।
* हड़प्पाई. शहरो का दूरस्थ देशो से सपर्क स्थापित करने का मुख्य कारण अमीर और प्रभावशली लोगो की आवश्यकताओ को पूरा करना था।
* इस युग मे लबाई. 37.6 सेमी की एक फूट की इकाई. पर आधारित थी और एक की लगभग 51.8 से 53.6 सेमी तक होती थी।
* मेसोपोटामिया के सूसा उर आदि शहरो मे हड़प्पा सभ्यता की या हड़प्पाकालीन मुहरो से मिलती जुलती लगभग दो दर्जन मुहरे पायी गयी है। फारस की खड़ी मे फैलका तथा बहरीन मे भी हड़प्पा कालीन मुहरे पायी गयी है।
* बेलनाकार मुहरो के नमूने मोहनजोदड़ो मे मेसोपोटामिया की सभ्यता पाये गये है।
* एक श्रृंगी पशु एक मिथकीय पशु था जिसका शरीर घोड़े जैसा है और सिर पर एक सीधा सींग है।
* हड़प्पा सभ्यता के लुप्त हो जाने के कारणों मे महाभयंकर बाढ़ के सिद्धात का समर्थन जल विज्ञानी आर.एल रेई.क्स ने किया है।
* डी.पी.अग्रवाल और सूद के अनुसार हड़प्पा सभ्यता हात्स उस क्षेत्र में बढ़ती हुई. शुष्कता के कारण और धगधर नदी हाकड़ा के सूख जाने के कारण हुआ।
* फेयर सर्विस ने हड़प्पा का हात्स पारिस्थितिक असतुलन को बताया है।
* उत्तर हड़प्पा काल में सिंध,आमरी तथा चान्हूदाहो मे झूकर मृद्भांड का प्रयोग करते है।
* बालाकोट में विकसित कूटीर उधोग था तथा यहां सीप के आभूषण बनाने का कारखाना था।
* राणाधुंडई. एवं डाबरकोट नगर के आग द्धारा विनाष के साक्ष्य मिले है।
* सिंधु क्षेत्र के कोटदीजी में किलेबंद बस्ती के साक्ष्य मिले है।
* रहमान की ढरी से सुनियोजित बस्ती के साक्ष्य मिले है।
* आमरी एवं कोटदीजी मे शहर का कोई. विभाजन नही था ओर कोई. किलेबदी नही थी।
* रायबहादूर दयाराम साहनी को सिधु घाटी की सभ्यता की खोजने का श्रेय को जाता है।
* 1921 मे सर जॉन मार्षल के निर्देशन इस स्थान की खुदाई. करवायी।
* 1922 में श्री राखाल दास बनर्जी के नेतृत्व में पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के लरकाना जिले के मोहनजोदड़ो में स्थित एक बौद्ध स्तूप की खुदाई. के समय एक और स्थान का पता चला।
* पिग्गट ने हड़प्पा एवं मोहनजोदडों को एक विस्तृत साम्राज्य की जुड़वा राजधानियॉं बतलाया।
* इस सभ्यता का प्रथम अवशेष हड़प्पा नामक स्थान से प्राप्त हुआ इसलिए इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता कहना ही अधिक उपयुक्त समझा गया।
* भारतीय उपमहाद्धीप में इस सभ्यता के लगभग 1000 स्थानों का पता चला है।
* 1856 ई.. मे ब्रिटिश भारत की हुकूमत ने करॉची से लाहौर एक रेलवे लाइन बिछवाने हेतू ई.टों की आपूर्ति के लिए इन खण्डहरो की खुदाई. प्रारभ करवायी।
* रेडियो कार्बन C-14 जैसी नवीन विष्लेशण पद्धति के द्धारा हड़प्पा सभ्यता का सर्वमान्य काल 2500 ई..पू से 1750 ई..पू. माना गया है।
* पाकिस्तान के पंजाब प्रांत मे स्थित माण्टगोमरी जिले मे रावी नदी के बाये तट पर यह पुरास्थल है।
* हड़प्पा करीब 5 किमी. के क्षेत्र मे बसा हुआ है।
* हडप्पा में कुछ महत्वपूर्ण अवशेष प्राप्त हुए। एक बर्त्तन पर बना मछुआरे का चित्र, शख का बना बैल,पीपल का बना इक्का ई.टों के वृत्ताकार चबूतरे।
* हड़प्पा में गेहॅू तथा जौ के दानो के अवशेष भी मिले है।
* हड़प्पा में सामान्य आवास क्षेत्र के दक्षिण मे एक ऐसा किब्रस्तान स्थित है जिसे समाधि आर 37 नाम दिया गया है।
* मोहनजोदड़ो के ध्वंशावेशष पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना जिले में सिंध नदी के दाहिने किनारे से प्राप्त हुए है।
* मोहनजोदड़ो करीब 5 किमी के क्षेत्र मे फैला हुआ है।
* 1922 मे राखाल दास बनर्जी को मोहनजोदड़ो के टीलो को खोजने का श्रेय जाता है।
* मोहनजोदड़ो मे एक बड़ा स्नानागार एवं महत्वपर्ण भवनो मे एक विशाल अन्नागार जिसका आकार 150X75 मी. है के अवशेष मिले है।
* सभाभवन एवं पुरोहित आवास के ध्वंशावेशष भी सार्वजनिक स्थलो के श्रेणी मोहनजोदडों मे आते है।
* मोहनजोदड़ो के पश्चिमी भाग मे स्थित दुर्ग टीले को स्तूप टीला भी कहा जाता है क्योकि यहॉ पर कुशाण शासकों ने एक स्तूप का निमार्ण करवाया था।
* मोहनजोदड़ो से मिले अन्य अवशेषों मे कुम्भकारो के 6 भट्ठो के अवशेष,सूती कपड़ा,हाथी का कपाल खण्ड,गले हुए ताबे के ढेर सीपी की बनी हुई. पटरी एवं कासे की नृत्यरत नारी की मूर्ति अवशेष मिले है।
* राना धुण्डई. के निम्न स्तरीय घरातल की खुदाई. से घोडे़ के दॉत के अवशेष प्राप्त हुए है जो संभवत: सिध सभ्यता एवं सस्कृति से अनेक शताब्दी पूर्व के प्रतीत होते है।
* मोहनजोदड़ो के दक्षिण में स्थित चन्हूदड़ो नामक स्थान पर मुहर और गुडियों के निमार्ण के साथ-साथ हड्डियों से भी अनेक वस्तुओं का निमार्ण होता है।
* 1931 में सर्वप्रथम चन्हूदड़ो गोपाल मजूमदार ने खोज की है।
* गुरिया निमार्ण हेतू चन्हूदड़ो मे एक करखानो का अवशेष मिला है।
* चन्हूदड़ो से प्राप्त अवशेषों मे अलकृत हाथी और कुत्ते द्वारा बिल्ली का पीछा करते हूऐ पद चिन्ह प्राप्त हुए है।
* सौन्दर्य प्रसाधनो मे प्रयुक्त लिपिस्टिक के अवशेष चन्हूदड़ो से मिले है।
* लोथल अहमदाबाद जिले मे भोगवा नदी के किनारे सरागवाला नामक गॉव के पास स्थित है।
* 1957-58 ई.. मे लोथल की खुदाई. रगंनाथ राव के नेंतृत्व मे की।
* सर्वाधिक प्रसिद्व उपलब्धि हड़प्पाकालीन बंदरगाह के अतिरिक्त विशष्ट मृद्भाण्ड,उपकरण,मुहरे बाट और माप एवं पाषाण उपकरण लोथल मे थी।
* लोथल के पूर्वी भाग में स्थित बंदरगाह (गोदी)का औसत आकार 214X36 मीटर तथा गहराई. 3.3 मीटर है।
* लोथल में गढ़ी और नगर दोनो एक ही रक्षा प्राचीर से घिरे है।
* लोथल मे अन्य अवशेषों मे चवाल (धान) फारस की मुहरो एवं घोड़ो की लघु मृण्मूर्तियो के अवशेष प्राप्त हुए है।
* लोथल सभंवत: समुद्र के तट पर स्थित सिधु सभ्यता का यह स्थल पश्चिमी एशिया के साथ व्यापार के दृष्टिकोण से सवोत्तम स्थल था।
* पजाब के रोपड़ जिले मे सतलज नदी के किनारे स्थित है।
* रोपड़ में हड़प्पा पूर्व एवं हड़प्पाकालीन सस्कृतियो के अवशेष मिले है।
* 1953-56 में रोपड़ की खुदाई. यज्ञ दत्त शर्मा द्धारा किया गया।
* रोपड़ से प्राप्त मिट्टी के बर्त्तन, आभूषण चार्ट,फलक एवं ताबे की कुल्हाड़ी महत्वपूर्ण है।
* रोपड़ में मिले मकानों के अवशेषों से लगता है कि यहॉ के मकान पत्थर एवं मिट्टी से बनाये गये थे।
* कालीबंगा राजस्थान के गंगानगर जिले में घग्घर नदी के तट पर स्थित है।
* 1953 में कालीबंगा की खुदाई. बी.बी.लाल एव बी.के.थापड़ द्धारा करायी है।
* कालीबंगा में प्राक् हड़प्पा एवं हड़प्पाकालीन संस्कृतियो के अवषेश मिले है।
* कालीबंगा में प्राक सैधव सस्कृति की सबसे महत्वपर्ण उपलब्धि एक जूते हुए खेत का साक्ष्य है।
* कालीबंगा के भवनो के अवशेष से स्पष्ट होता है कि भवन कच्ची ई.टो के बने थे।
* कालीबंगा की प्राक्-सैधव कालीन बस्तियों मे प्रयुक्त होने वली ई.टे 30X20X10 सेमी आकार की होती है।
* कालीबंगा की मकानो के अवशेषों से पता चलता है कि सभी मकान कच्ची ई.टो से बनाये गये थे।
* कालीबंगा मे कम दूरी के खॉचो मे चना एवं अधिक दूरी के खॉचो मे सरसो बोई. जाती थी।
* कालीबंगा मे लघु पाषाण उपकरण,माणिवय एवं मिट्टी के मनके,षख,कॉच एवं मिट्टी की चुड़ियां खिलौना,गाड़ी के पहिए,सॉड की खण्डित मृण्मूति,सिलबटटे आदि पुरावशेष मिले है।
* कालीबंगा मे नली और कुओं मे पक्की ई.टों का प्रयोग किया गया था।
* 1964 मे सुरकोतड़ा की खोज जगपति जोशी ने की।
* सुरकोतड़ा से प्राप्त अवषेशों में महत्वपूर्ण है घोडे़ की अस्थियॉ एवं एक अनोखा कब्रगाह।
* सुरकोतड़ा से सिंधु सभ्यता के पतन के अवशेष परिलक्षित होता है।
* आलमगीरपुर पष्चिमी उत्तर प्रदेष के मरेठ जिले में युमना की सहायक हिण्डन नदी पर स्थित। इस पुरास्थल की खोज 1958 में यज्ञ दत्त शर्मा द्वारा की गयी।
* आलमगीरपुर हड़प्पा संस्कृति का सर्वाधिक पूर्वी पुरास्थल है।
* आलमगीरपुर सैधव सभ्यता की अतिंम अवस्था को सूचित करता है।
* आलमगीरपुर में बर्त्तन,मनके एवं पिण्ड मिले है।
* रगंपुर गुजरात के काठियावाड़ प्रायद्धीप मे मादर नदी के समीप स्थित है।
* 1953-54 में रगंपुर की खुदाई. रगनाथ राव द्वारा।
* रगंपुर मे पुर्व कालीन हड़प्पा संस्कृति के अवशेष मिले है।
* रंगपुर में मिले कच्ची ई.टों के दुर्ग,नालियां मृद्भाण्ड,बॉट,पत्थर के फलक आदि महत्वपूर्ण है।
* रगंपुर में धान की भूसी के ढेर मिले है।
* रगंपुर में उत्तरोत्तर हड़प्पा संस्कृति के साक्ष्य मिलते है।
* बनवाली हरियाणा के हिसार जिले मे स्थित दो सास्ंकृतिक अवस्थाओं के अवशेष मिले है।
* बनवाली हड़प्पा पूर्व एवं हड़प्पा कालीन खुदाई. 1973-74 र्ई.. मे रवीन्द्र सिंह विष्ट के नेतृत्व में।
* बनवाली में अच्छे किस्म के जौ मिले है।
* बनवली में मिट्टी के बर्तन,गोलियां,मनके,मनुश्यो एवं हल की आकृति के खिलौने आदि मिले है।
* सुल्कागेनडोर दक्षिण बलूचिस्तान में दशक नदी के किनारे स्थित है।
* सुल्कागेनडोर की खोज 1927 ई.. मे आरेल स्टाइन ने की थी।
* सुल्कागेनडोर मे सभवत: यह समुद्र तट पर अवस्थित एक बदरगाह था।
* सुल्कागेनडोर से मनुष्य की अस्थि राख से भरा बर्त्तन ताबे की कुल्हाड़ी, मिट्टी से बना चुड़िया एवं बर्त्तनो के अवषेश मिले है।
* खर्वी अहमदाबाद से 114 किमी की दूरी पर स्थित इस स्थान से हड़प्पाकालीन मृद्भाण्ड एवं ताम्र आभूषण के अव शेष मिले है।
* कुनुतासी मोरवी से 30 किमी दूर इस स्थल की खूदाई. में बन्दरगाह एवं व्यापारिक केन्द्र होने का अव शेष मिले है।
* सिंध प्रान्त के खैरपुर नामक स्थान पर यह स्थल स्थित कोटदीजी है।
* घुये ने 1935 मे कोटदीजी के सर्वप्रथम की थी।
* 1953 में फजल अहमद खान द्धारा कोटदीजी की नियमित खूदाई. सम्पंन्न करायी गयी।
* कोटदीजी में संभवतं यहॉ पर पत्थर का उपयोग धर बनाने मे किया जाता था।
* कोटदीजी में पाषाणयुगीन सभ्यता का अतं यही पर हुआ था।

हड़प्पाकालीन नदियों के किनारे बसे शाहर:-

सिंधु सभ्यता के प्रमुख स्थल एवं उसके खोजकर्त्ता

शाहर नदी/सागर तट
मोहनजोदड़ो सिधं नदी
हड़प्पा रावी नदी
रोपड़ सतलज नदी
कालीबंगा घग्घर नदी
लोथल भोगवा नदी
सुल्कागेनडोर दाष्क नदी
वालाकोट अरबसागर
सोल्का कोह अरबसागर
कोटदीजी सिंध नदी
रंगपुर मादर नदी
आलमगीरपुर हिन्डन नदी
प्रमुख स्थल खोजकर्त्ता का नामवर्ष
हड़प्पा माधो स्वरूप वत्स, दयाराम सहनी1921
मोहनजोदड़ो राखालदास बनर्जी1922
रोपड़ यज्ञदत्त शर्मा 1953
लोथल रंगनाथ राव1954
कालीबंगा ब्रजवासी लाल1961
रंगपुर माधोस्वरूप वत्स,रंगनाथ राव 1931-1953
चन्हूदड़ो गोपाल मजूमदार1931
सुरकोतड़ा जगपति जोषी1967
बनवाली रवीन्द्र सिंह विष्ट1973
आलमगीरपुर यज्ञ दत्त शर्मा 1958
कोटदीजी फजल अहमद1953
सुत्कोगेनडोर ऑरेल स्टाइन1927
* स्नानागार के पश्चिम मे स्थित अन्नागार सभवत: मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ा इमारत थी। 45.72 मीटर लम्बा 22.86 मीटर चौड़ा।
* बन्दरगाह लोथल की महत्वपूर्ण उपलब्धियो मे से है।
Bhakti and Sufi Movement
Bharat Ke Parmukh Aitihasik Yuddh Chalukya Dynasty
* लोथल बंदरगाह में मिस्र और मेसोपोटामिया से जहाज आते जाते थे।(औसत आकार 214 और 36 मीटर गहराई. 3.3 मीटर है।)
* हड़प्पा लिपि का सवाधिक पुराना नमूना 1853 ई.. मे मिला था पर स्पष्टत: यह लिपि 1923 तक प्रकाश मे आई.।
* हड़प्पा लिपि को हाल में के.एन. वर्मा एस.आर.राव ने इस लिपि के कुछ चिन्हों को पढ़ने की बात कही थी।
* हड़प्पा लिपि की कुल करीब 2000 की सख्या मे मुहरें प्राप्त की जा चुकी है।
* ये मुहरें बेलनाकार,वर्गकार,आयताकार एवं वृत्तकार रूप मे मिली है।
* मुहरो का निर्माण अधिकत्तर सेलखड़ी से हुआ है।
* हड़प्पा के अधिकांश मुहरो पर संक्षिप्त लेख,एक श्रृगी सांड़,भैस,बाघ,गैडा,हिरण,बकरी और हाथी के चित्र उकेरे गये है।
* हड़प्पा में सर्वाधिक आकृतियां एक श्रृगी साड़ की उत्कीर्ण मिली है।
* मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पशुपति शिव की आकृति बनी है।
* मोहनजोदड़ो एवं लोथल से प्राप्त एक अन्य मुहर पर नाव का च़ित्र बना मिला है।
* मोहनजोदड़ो लोथल और कालीबंगा से राजमुद्राक मिले है।
* हड़प्पा सभ्यता से मिल मृण्मूतियों का निर्माण मिट्टी से किया गया है।
* हड़प्पा मे मृण्मूतियो पर मानव के अतिरिक्त पशु-पक्षियों में बैल,भेड़ा बकरा, बाघ, सुआर, गैड़ा भालू,बंदर, मोर,तोता,बत्तख एवं कबूतर की मृण्मूतियों मिली है।
* मानव मृण्मूतियो ठोस है पर पशओं की खोलकी।(हड़प्पा)
* हड़प्पा मे नर और नारी मृण्मूतियां मे सर्वाधिक नारी मृण्मूतियां मिली है।
* धातु की बनी मूतियो अब तक मोहनजोदडो,चान्हुदड़ो लोथल और कालीबंगा से प्राप्त हुई. है।
* मोहनजोदड़ो से प्राप्त 10 सेमी लम्बी कांस्य की मूर्ति के गले मे कष्ठहार सुषोभित है।
* चान्हुदड़ो से बैलगाड़ी इक्का गाड़ी, लोथल से तांबे की बैल की आकृति और कालीबंगा से ताबे की वृषभ की आकृति मिली है।
* प्रस्तर मूतियों में सवाधिक प्रसिद्ध मोहनजोदड़ो से प्राप्त योगी अथवा पुरोहित की मूति उल्लेखनीय है।
* हड़प्पा संस्कृति की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विशेषता थी इसकी नगर योजना प्रणाली ।
* हड़प्पा की मुख्य रूप से गेहॅू और जौ की खेती की जाती थी।
* हड़प्पा की 9 फसले पहचानी गयी है।
* सभवत: राजस्थान से चावल के प्रथम प्रमाण लोथल से मिले है।
* हड़प्पा में जौ की दो किस्में, गेहॅू की तीन किस्मे,कपास,खजूर तरबूज मटर और एक ऐसी किस्म जिसे ब्रासिका जुंसी की सज्ञा दी गयी है।
* लोथल में हुई. खुदाई. में धान ओर बाजरे की खेती के अवशेषो मिले है।
* कालीबंगा में प्राक सैधव अवस्था के एक हल से जुते हुए खेत का प्रमाण मिला है।
* बनवली में मिट्टी का बना हुआ एक हल का खिलौना मिला है।
* हड़प्पा के लोग लकडी के हल का प्रयोग करते थे।
* संभवत: हड़प्पा सभ्यता के लोग ही सबसे पहले कपास उगाना प्रारभं किये।इसीलिए यूनानी लोगो ने इस प्रदेश की सिडोन कहा।
* लोथल से आटा पीसने की पत्थर की चक्की के दो पाट मिले है।
* लोथल एवं रंगपुर सें घोडे़ की मृण्मूतियों के अवशेष मिले है।
* सुरकोतड़ा से सैन्धव कालीन घोडे़ के अस्थिपंजर के अवशेष मिले है।
* मोहनजोदड़ो से बने हुए सूती कपड़ो का एक टुकड़ा मिला है।
* कालीबंगा से मिले मिट्टी के बर्त्तन के एक टुकड़े पर सूती कपडे़ की छाप मिली है।
* हड़प्पाई. लोग सिन्धु सभ्यता क्षेत्र के भीतर पत्थर,धातु शक्ल आदि का व्यापार करते थे।
* हड़प्पा लोग कच्चे माल दूसरे देशों से मगाते थे।
* नियार्त हड़प्पाई. दूसरे देश में करते थे।
* हड़प्पा मोहनजोदड़ो,लोथल एवं कालीबंगा मे प्रयुक्त वाटो की तोल का अनुपात 1,2,4,8,16,32,64,160,200,320 आदि था।
* तौल का इकाई. सभवत: 16 अनुपात मे थी।
* मोहनजोदड़ो से सीप का तथा लोथल से हाथी से निमिर्त एक-एक पैमाना मिला हैं।
* सैधव सभ्यता के लोग यातायात के रूप में दो पहियो और चार पहियों वाली बैलगाड़ी अथवा भैसागाड़ी का उपयोग करते थे।
* हड़प्पा सभ्यता के लोगों का व्यापारिक सबंध राजस्थान,अफगानिस्तान,ई.रान और मघ्य एशिया के साथ था।
* हड़प्पावासियो ने लाजवर्द मणि का व्यापार सुदूर देशों से लिया था।
* मेसोपोटामिया में प्राप्त सभ्यता से सबंधित-अभिलेखो एवं मुहरो पर मेलुहा का जिक्र मिलता है।
* मेलुहा सिंध क्षेत्र का ही प्राचीन भाग है।
* दिलमुन एंव माकन व्यापारिक केन्द्र मेलुहा एवं मेसोपोटामिया के बीच स्थित है।
* मेसोपोटामिया में प्रवेश हेतु उर एक महत्वपूर्ण बंदरगाह था।
* दिलमुन की पहचान फारस की खाड़ी के बहरीन द्धीप से की जाती है।
* भारत में लोथल से फारस की मुहरें प्राप्त होती है।
* स्टुअर्ट पिग्गॉट महोदय ने कहा कि सिंधु प्रदेश के शासन पर पुरोहित वर्ग का प्रभाव था।
* हंटर के अनुसार मोहनजोदड़ो का शासन राजतन्त्रात्मक ने होकर जनतंत्रात्मक था।
* मैके के अनुसार मोहनजोदड़ो का शासन एक प्रतिनिधि शासक के होथो में था।
विभिन्न क्षेत्रों से आयात किये गये कच्चे माल।
कच्चा मालक्षेत्र
टिन अफगानिस्तान,ईरान
ताबांखेतड़ी (राजस्थान)वलूचिस्तान
चॉदीईरान,अफगानिस्तान
सोनाअफगानिस्तान,फारस,दक्षिणी भारत
लाजवर्द मेसोपोटामिया
सेलखड़ीवलूचिस्तान,राजस्थान,गुजरात
नीलरत्नबदख्शां
नीलमणि महाराष्ट्र
हरितमणिदक्षिण एशिया
शंख तथा कौड़ियॉसौराष्ट्र,दक्षिण भारत
सीसाईरान,अफगानिस्तान,राजस्थान
शिलाजीत हिमालय क्षेत्र
* वृक्षपूजा के प्रमाण मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक सिल पर बने पीपल की डालों के मध्य देवता से मिलता है।
* पशुओं मे कूबड़ वाला सॉड इस सभ्यता के लोगो के लिए विशेष पूजनीय था।
* अधिक मात्रा में मिली ताबीजो से ऐसा लगता हैं कि सिधं सभ्यता के लोग भूत प्रेत एवं तंत्र-मंत्र में भी विश्वास करते थे।
* हड़प्पा मे नागपूजा के भी प्रमाण मिले है।
* लोथल और कालीबंगा से हवन कुड़ो एवं यज्ञवेदियों का उपलब्ध होना अग्निपूजा के प्रचलन का प्रमाण मिला है।
* भोजन के रूप में सैन्धव सभ्यता के लोग गेहॅू,जौ,खजूर और भेड़,सूअर,मछली के मास को खाते थे।
* हड़प्पा के लोग वस्त्र में सूती और ऊनी दोनो प्रकार के कपडों प्रयोग होने के प्रमाण मिले है।
*हड़प्पा मनोरंजन के साधनो में मछली पकड़ना शिकार करना पशु-पक्षियों का आपस में लड़ाना,चौपड़ पासा खेलना आदि शामिल थे।

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