| ☛भारत में भक्ति आंदोलन इतिहास काफी प्राचीन हैं। |
| ☛शिव,विष्णु और ब्रह्मा की पूजा भक्ति भावानाओं पर आधारित थी। |
| ☛मौयोंत्तर काल में भागवत आदोलन तथा पाशुपत पन्थ भी भक्ति पर थी। |
| ☛गीता में कर्म और ज्ञान के साथ भक्ति को भी मोक्ष को एक रास्ता माना गया है। |
| ☛भक्ति आंदोलन के दो भाग है- प्रथम प्रपत्ति अथवा समर्पण मार्ग और द्धितीय प्रेम मार्ग। |
| ☛प्रपत्ति मार्ग में ईश्वर तथा भक्त का सबंध स्वामी तथा दास जैसा था। |
| Bharat Ke Parmukh Aitihasik Yuddh
| Chalukya Dynasty | |
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| ☛भागवत पुराण में कृष्ण भक्ति प्रथम वर्णन हमें मिलता हैं। |
| ☛विष्णु भक्त सन्त अलवार कहे जाते थे। |
| ☛आन्डाल नामक महिला अलवार संत थी। |
| ☛भक्ति आंदोलन समतावादी दृष्टिकोण से युक्त था। |
| ☛तमिल भक्ति रचनाओं की एक प्रमुख विशेषता जैन और बौद्ध के प्रति उनका विरोध है। |
| ☛8 वीं या 9 वीं शताब्दी में शंकराचार्य ने अद्धैत मत का प्रवर्त्तन किया। |
| ☛तुर्क आक्रामण से पूर्व ही अपधर्मी अथवा विरोधी आंदोलन उत्तर भारत में चल रहा था। |
| ☛अपधर्मी आंदोलन में मुख्यत: तात्रिंक तथा नाथ पंथी आंदोलन सम्मिलित थें। |