| ★ खारवेल ने पिघुण्ड नगर में गदहो का हल चलवाया था। |
| ★ इस नगर की पहचान मसूलीपट्टम स्थित पिटुण्ड् नामक स्थान से की जाती है। |
| ★ 8 वें वर्ष में खारवेल मगध पर आक्रमण कर बराबर पहाड़ी (गया) तक पहुच गया।उसने बराबर पहाड़ी में स्थित गोरठगिरि किले को नष्ट कर दिया। |
| ★ 9 वे वर्ष खालवेल ने ब्राह्मणों को सोने का कल्पवृक्ष भेट किया।इस वृक्ष के पत्ते तक सोने के बने थे। |
| ★ खारवेल ने प्राचीन नदी के दोनो किनारो पर लगभग 35 लाख रजत मुद्राओं की लागत से विजय प्रसाद नामक एक महल बनवाया। |
| ★ 11 वें वर्ष में खारवेल ने लकड़ी द्धारा निर्मित 1300 वर्ष पुरानी केतुयद्र की प्रतिमा के साथ जुलूस निकाला इसके पूर्व यह प्रतिमा पृथु-दक-दर्य शहर में स्थापित की गई थी। |
| ★ 13 वें वर्ष में खारवेल का झुकाव धर्म की ओर हुआ परिणामस्वरूप कुमारी पर्वत पर अर्हतों के लिए उसने देवालय निर्मित करवाया। |
| ★ खारवेल को शातिं एवं समृद्धि का सम्राट,भिक्षुसम्राट एवं धर्मराज के रूप में जाना जाता था। |
| ★ खारवेल जैन धर्म का अनुयायी था। |